Sunday, March 31, 2013

" सर्वा सिक्षा अभियान सिरोही "

३० मार्च २०१३ सर्वा सिक्षा अभियान सिरोही के अंतर्गत ज़िल्ला के पाँचो ब्लॉक के महिला अध्यापिका का एक विशेष कार्यक्रम
का आयोजन किया गया शांतिवान के परिसर मे रेडियो मधुबन के सहयोग से सुबह ११ बजे से शाम ४.३० तक ये कार्यक्रम
हुवा मंच का सुरुवत सवगत सत्कार और सरस्वती वंदना से किया गया.
 बालिका शिक्षा को बढ़ाव के लिया इस मंच का आयोजन किया गया  मंच का सुरुवत सवगत सत्कार और सरस्वती वंदना से किया गया
 जिस मे राजयोगिनी सीलू दीदी के द्वारा नारी सशक्तिकारण पर ज़ोर दिया गया और बी. के. भोपालभाईजी के द्वारा संस्थान का परिचय दिया गया . और मंच पर विशेष ज़िला सिरोही के अधिकारी सैयद अली सैयद ज़िल्ला परियोजना अधिकारी कांतिला कात्री और पूनम सिंगजी, बुरारामजी, क्रांति रात्ोड़,पूर्णिमा पटेल, मानरम कोली,कमलेश ओझा के साथ २०० महिला अध्यापिकावो ने हिस्सा लिया और सभी ने अपने अपने समता अनुसार कार्यक्रम मे भाग लिया और बालिका सिक्षा पर ज़ोर दिया जिस का रेकॉर्डिंग भी किया गया रेडियो मधुबन की और से विशेष प्रसारण के लिए और इन सब के बीच रेडियो मधुबन का विशेष भूमिका रहा आबू रोड और पिंडवाडा ब्लॉक के लिए रेडियो के द्वारा विशेष कार्यक्रम बच्चो के लिए प्रसारण किया जाएगा जिसका इस मंच के द्वारा ही बताया गया और इसकी सिकृति के लिए रेडियो मधुबन द्वारा पत्र भी सर्वा सिक्षा अभियान को दिया गया और महिला अध्यापिका पाँचो ब्लॉक की अपनी अपनी साल भर के कार्यक्रम का विशेष उल्लेक मंच के द्वारा किया और अंत मे सभी अधिकारी भी अपना विचार व्यक्त किए ...

कांतिलाल कात्री - परियोजना अधिकारी सिरोही ने कहा की रेडियो मधुबन के सहयोग के बिना ये कार्यक्रम संभव नही होता इस लिए मे रेडियो मधुबन के टीम को बहुत धन्यवाद करता हू और जैसे उन्होने रेडियो पर बच्चो के लिए कार्यक्रम प्रसरण करते है ये एक नया और आधुनिक कदम होगा जिस से अध्यापक और बच्चो को बहुत लाभ मिलेगा और एक सकरात्मक बदलाव आएगा.

सैयद अली सैयद - ज़िला सिरोही के अधिकारी ने कहा ये बहुत ही अच्छा मंच है जहा पाँच ब्लॉक की महिला अध्यापिका एक साथ मिलकर कार्यशाला कर रही है एक दूसरे से मिलने से अनुभव बढ़ता है और नया नया सिख भी मिलता है और मुझे आशा है की आप लोग यहा से जाने के बाद बालिकावो को सिक्षा से जोड़ने का कार्य तो करेंगे ही और ये भी देखेंगे की जो बालिकाए अभी पढ़ रही है वो आगे भी पढ़े .........

क्रांति रात्ोड़ - अध्यापिका सहयोजिका आबू रोड मुँगतला - अंत मे कहा की अध्यापीकाओ को आज़ाद मंच चाहिए जिस मे वो अपनी बात को रख सखे और अपने बाल पर नया करके दिखा सखे ...... और साथ मे कार्यक्रम के आयोजन के लिए कहा  राज्य मे इस तरह का कार्यक्रम और आयोजन पहली बार इतना अछा विशेष भोजन के साथ और विधि पूर्वक हुवा थॅंक्स रेडियो मधुबन को.

इस कार्यशाला का अंत गीत के द्वारा किया गया सब के चहरे पर एक खुशी थी.






Friday, March 29, 2013

आंख और जुबान

आंख  और  जुबान 

मनुष्य जीवन में बदलाव एक नया पण लता है और सुना भी है परिवर्तन संसार का नियम है 
इस लिए जब भी कोई गड़बड़ी नज़र कही भी नज़र आये तो परिवर्तन एक मात्र मंत्र है उसका उपयोग करे 
आईये  एक नज़र संसार पर डाले आज मनुष्य जाती में दो पुरानी बुराईया दिखाई देती है 
एक ताने मरने की याने किसी की भी कमी देख उसको डाटना या कडवे बोल बोलना 
दूसरा आंख दिखाना  याने किसी के प्रति बुरी नज़र या फिर किसी की कामयाबी पर जलना 
पुरुष और महिला दोनों में ये देखा गया है ...." एक संत कहते है पुरुष आंख दिखाना  और महिलाए  ताने मरना 
छोड़ दे तो जीवन और समाज के आधे -संघर्ष  खत्म हो जायेंगे ."
अस्त्र -शास्त्र से अब तक जितने लोग नहीं मरे होंगे उससे भी अधिक लोग ताने और आंख दिखने  से मर चुके है 
अगर हम ऊपर की बातो से सहमत है तो आईये एक छोटा सा परिवर्तन करते है 
बस , अपनी आंख और जुबान को संभाल ले, सब कुछ संभल जायेंगा आंख और जुबान बहुत ही नाजुक है इस लिए इनका उपयोग संभल कर करना है क्यू की सारा गड़बड़ इन्ही से सुरु हुवा है इस लिए अब इन्ही को टिक से चलाना  है तब सब कुछ टिक हो सकता है


Thursday, March 28, 2013

मंदिर और मस्जिद








मंदिर और मस्जिद 
 
एक बार  आवो अपने दिल से बात करते है ....
कोई मंदिर गिर जाए तो बहुत ज्यदा घबराने की जरुरत नहीं है,
कोई मस्जिद टूट जाये तो भी बहुत हल्ला मचाने की जरुरत नहीं है 
मंदिर और मस्जिद तो सैकोड़ो बार बनेगे-टूटेंगे 
लेकिन इंसानियत का मंदिर 
एक बार खंडित हो गया तो फिर किसी में इतना 
दम नहीं है कि उसे दुबारा से खड़ा कर सके 
क्या मिट्टी की ईट, चारित्र के चुना और सत्य के 
सीमेंट से ज्यादा हो सकता है ?
सत्य और चारित्र का क्या महत्व है 
सत्य वन बनो चारित्र वन बनो 
 आज संसार को इस की जरुरत है 
 अगर आप चरित्रवान है तो आपके लिए 
मंदिर मस्जिद से ज्यादा मूल्य इंसानियत का होगा  
आप समझ गए होंगे की हमारे जीवन में
इंसानियत का कितना महत्व है…. 





Zilla Parivahan Karyalay Abu Road

video
                                                
It was a pleasure for me to take a chance of the prog.at Abu road of zilla parivahan karyalay opening cermony. to do live ( narrow cast ) on Radio Madhuban 90.4fm ...Rajya Mantri virendra beniwal & other V.I.P collector S.P. from sirohi were on stage. and near about thousands of people were attending the prog.

Wednesday, March 27, 2013

Anna Hazare talks about his vision


‘भारत-रत्न’ अनेक महान व्यक्तियों की जीवन-गाथा के साथ यह भारत के उस काल का इतिहास भी है, जिस काल से इन आदर्श पुरुषों का संबंध रहा। ‘भारत-रत्न’ केवल राजनेताओं का ही नहीं वरन इसमें वे लोग भी सम्मिलित हैं जिन्होंने देश को नई उपलब्धि दी और देश को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करने का यत्न किया।
 जैसे छोटा-सा तिनका हवा का रुख़ बताता है वैसे ही मामूली घटनाएँ मनुष्य के हृदय की वृत्ति को बताती हैं।
अन्ना हजारे भी एक ऐसी छोटी सी क्रांति लाने का प्रयास कर रहे है ..जो पुरे भारत को और उसके सिस्टम को बदल देगा और भ्रस्टाचार मुक्त भारत बन जायेगा ....

Tuesday, March 26, 2013

Anna Hazare Visit to Shantivan

                 

   Some People  have their mission very powerful and they never give up ...
the same thing today we see in Anna Hazareji who taken a vision of jan lokpal bill 
 for India and he is working with is soul and from 31st March he is starting the Mission for 18 months means one and half year prog. To aware the people about the" jan lokpal bill " his mission is to make a group of 6 cored people who can come on Road and support him for Jan Lokpal Bill and the Govt.  
will change this the last & Final way to Make India a corruption Free India





 

होश-हवास

 होश-हवास

  
 हैप्पी होली .............
अपने होश-हवास में कुछ ऐसे सत्कर्म जरुर कर लेना 
ताकि मुत्यु के बाद तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए किसी और को 
भगवान से प्रार्थना न करनी पड़े .
क्यू की औरो के जरिये की गई प्रार्थनाए तुम्हारे बिल्कुल भी काम आने वाली नहीं है 
क्या तुम्हे पता नहीं की अपना किया हुआ  और अपना दिया हुआ ही काम आता है ?
आज मन की भूमि पर ऐसे बीज मत बोना की कल उनकी फसल काटते वक्त 
ऑंसू बहाने पड़े 

  दुनिया की रीत निराली है। लोग 'प्रयासों' को नहीं, 'परिणामों' को देखकर शाबाशी देते हैं। 'पश्चाताप' को नहीं, 'प्रायश्चित' को सराहते हैं। 'खेती' को नहीं, 'फ़सल' को देखकर मुग्ध होते हैं। सुन्दरता की प्रशंसा 'फूल' की होती है न कि 'बीज' की।
इस लिए यहाँ हम सब को मिलकर कुछ प्रयास करना है ........
किसीने टिक कहा है की देह सहित देह के सब रिश्ते नतो को भूल खुद को आत्मा समझ 
परमात्मा और उसकी रचना को जानो तो मूल सरूप का आनंद अनुभव में आयेगा 
जहा आप सदा और सर्वदा सुख शांति का अनुभव कर पाएंगे  

Monday, March 25, 2013

"Happy Holi"


 होली-होली  का सही अर्थ है सब भूल जा और नयी ज़िन्दगी की सुरवात कर   ................

how to celebrate holi

how to celebrate holi
'होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं' हो या फिर 'होली खेले रघुवीरा अवध में होले खेले रघुवीरा' या फिर और कोई गाना हो, होली के सीजन में सभी गानों को सुनना अच्छा लगता है। अगर आपका होली से संबंधित और भी गानें सुनने का मूड हैं तो 'होली सांग' ऐप्लीकेशन को डाउनलोड कर सकते हैं।

ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। होली आयी रे कान्हा, आज ब्रज में होली और सात रंग में होली समेत इसमें होली के कई गानें दिए हैं। होली से संबंधित इन सभी ऐप्लीकेशन को गूगल प्ले से फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है।

पूजा और भरोसा

  " पूजा और भरोसा "       

              
  लक्ष्मी पूजा के काबिल तो है लेकिन भरोसे के काबिल कतई नहीं है 
लक्ष्मी की पूजा तो करना मगर लक्ष्मी पर भरोसा मत करना 
और   भगवान की पूजा भले ही मत करना लेकिन भगवान पर भरोसा हर हाल में रखना 
दुनिया में भरोसे के काबिल सिर्फ भगवान ही है 
लक्ष्मी का क्या भरोसा ? व़ह तो चंचला है 
आज यहाँ और कल वह़ा 
जिस-जिस ने भी इस पर भरोसा किया 
आखिर में वह रोया है  


Sunday, March 24, 2013

बुजुगॊ की संगति करो

 " बुजुगॊ की संगति करो "

बुजुगॊ के चेहरे की एक एक झुर्री पर हजारों अनुभव लिखे होते है 
उनके कांपते हुवे हाथ, हिलती हुई गर्दन,लड़खड़ाते हुवे कदम और 
मुरझाया हुवा चेहरा सन्देश देता है की जो भी शुभ करना है,वो 
आज, अभी और इसी वक्त कर लो 
कल कुछ नहीं कर पाऒगे 
बूढा इंसान इस धरती का 
सब से बड़ा सिक्षालय है क्यू की 
उसे देखकर उगते सूरज की 
डूबती कहानी का बोध होता है .
 (मुझे लगता है आप समझ गए होंगे पर कही कभी कभी ये वैसे नहीं होता जैसे लिखा है लेकिन कुछ मात्र कम जादा हो सकता है ,बीमारी या फिर सिक्षा और समझ और समाज से भी जुड़ा होता है )

Thursday, March 21, 2013

मौत दो बातों पर हँसती है

मौत दो बातों पर हँसती है

हम अपने मौत को कभी कभी याद करते है
 और किसी के मौत पर बहुत दुखी भी होते है 
और कभी ऐसा भी होता है हम बिमार होते है 
तो डॉक्टर के पास जाते है और कुछ ऐसा भी होता है 
तो तब, डॉक्टर कहता है मरीज को की तुम निश्चिंत रहो में हु ना
और दूसरा जब किसी के मरने पर कोई आदमी कहता है "बेचारा चल बसा " 
और ये कहने वाला इस अंदाज़ में कहता है जैसे वह कभी नहीं मरेगा 
मौत उसके इस अंदाज़ पर हँसती है और कहती है; टीक है बच्चू ! 
तूने उसको "बेचारा" कहा तो अब तेरा ही नंबर है 
यहा कौन है ? जो मुत्यु की क्यू  में न खड़ा हो ?
और मुझे लगता है अगर हम रोज अपने मौत को याद कर ले 
तो कोई गलत कर्म हम से नहीं होगा 
सोचो दिल से .................

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Wednesday, March 20, 2013

चलो चाँद को छु ले


असफल होकर व्यक्ति अपने रचयता याने ईश्वर की योजना ही नष्ट कर देता है 
यह पाप ही नहीं, इंसान को रचने वाले के प्रति विश्वासघात, 
उस का अपमान और उसके प्रेम के प्रति तिरस्कार भी है
 यदि यह सत्य व्यक्ति की समझ में आ जाए 
तो उसके जीवन में क्रांति आ जायेगी और उसके 
दुःख और कष्ट स्वयं दूर हो जायेंगे     



"Great Motivational Thoughts"

ज़िन्दगी के केवल चार दिन है 
और वे चार दिन भी दो आरजू और दो इंतजार में कट जाते है 
इस से आगे बढ़े तो इंसान की सिर्फ दो दिन की कुल ज़िन्दगी है 
और उन दो दिनों में एक दिन मौत का भी होता है 
अब बचा केवल एक दिन और पता नहीं,
 इस एक दिन की ज़िंदगी पर आदमी इतना क्यू अकड़ता है ?
 ज़िंदगी की हैसियत एक मुटठी  राख से ज्यादा कुछ भी नहीं है 
तो भाई अब ज़िंदगी जीयो ऐसे की ज़िन्दगी को एक नयी ज़िंदगी मिले 

Tuesday, March 19, 2013

Start the things which u love from Today

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कविता , गीत , कहानिया  जिस भी तरह आपके जीवन में आये उसे समझे और सिख ले और अपने जीवन को एक नया रूप प्रधान करे पर आज बहुत लोग सुनते है पर उसे जीवन में लाये ये कम होता है…।
और हम और आप चलो आज से इस की सुरुवात करे 

माँ महात्मा और परमात्मा

माँ  महात्मा और परमात्मा 
ज़िन्दगी में  माँ ,महात्मा, परमात्मा  से  बढकर  और कुछ नहीं है ......
जीवन में तीन  आशीर्वाद बहुत जरुरी है 
१) बचपन में माँ का 
२) जवानी में महात्मा का 
३) बूढापे   में  परमात्मा  का 
इस तरह  माँ बचपन को  संभाल  लेती है  और जवानी में  नियत  बदले  या  बिगड़े  तो ...
उपदेश  देकर  महात्मा  सुधार  देता है  और  बूढापे  में  मौत बिगड़े  तो 
परमात्मा  संभल  लेता है ........इस लिए किसीने  टिक  कहा है 
माँ   महात्मा  और  परमात्मा  ही ज़िन्दगी  है ...
धर्म , पूरण  और इतिहास  में से अगर ये  तीन  शब्द  निकाल  दे तो वे 
महज  कागजों  के  पुलिंदे  मात्र  रह  जाते  है…